देसी गेहूं पैदावार और फायदे gehun ki kism

हरियाणा के जींद जिले की जलवायु और मिट्टी (दोमट या चिकनी मिट्टी) गेहूं की खेती के लिए बहुत उपयुक्त है। जींद में सोना मोती, बंसी और अन्य देशी किस्मों को सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है।

यहाँ आपकी मदद के लिए तुलनात्मक जानकारी दी गई है:

1. जींद के लिए उपयुक्त किस्में

 * सोना मोती (Sona Moti): यह प्राचीन किस्म जींद की उपजाऊ मिट्टी में अच्छी होती है। इसे कम पानी की जरूरत होती है और इसे 'जीरो बजट प्राकृतिक खेती' (ZBNF) के तहत आसानी से उगाया जा सकता है।

 * बंसी (Bansi/Bansi Gold): यह कठोर किस्म है जो हरियाणा की गर्मी और जलवायु को सहने में सक्षम है।

 * C-306: यह हरियाणा की सबसे लोकप्रिय पुरानी किस्मों में से एक है, जिसे इसके बेहतरीन स्वाद और रोटी की गुणवत्ता के कारण आज भी काफी पसंद किया जाता है।

2. किस्मों की तुलना: फायदा किसमें है?

किसमें ज्यादा फायदा है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका लक्ष्य "ज्यादा पैदावार" है या "ज्यादा कीमत":

| आधार | देशी किस्में (सोना मोती / बंसी) | आधुनिक हाइब्रिड (जैसे DBW 303, WH 1105) |

|---|---|---|

| पैदावार (Yield) | कम (10-15 क्विंटल प्रति एकड़) | अधिक (22-28 क्विंटल प्रति एकड़) |

| लागत (Cost) | बहुत कम (खाद-दवाई की जरूरत न के बराबर) | अधिक (महंगी खाद और कीटनाशक जरूरी) |

| बाजार भाव | बहुत ज्यादा (₹4,000 - ₹8,000 प्रति क्विंटल) | कम (MSP पर - लगभग ₹2,275 - ₹2,400) |

| पानी की जरूरत | कम | अधिक |

3. आपके लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद क्या है?

 * अधिक मुनाफा (Profit): यदि आप सीधे ग्राहकों (Direct Selling) या 'ऑर्गेनिक मंडी' में सोना मोती या बंसी बेच सकते हैं, तो इसमें हाइब्रिड से 2-3 गुना ज्यादा मुनाफा है। भले ही पैदावार कम हो, लेकिन इसकी ऊँची कीमत और कम लागत आपकी बचत बढ़ा देती है।

 * सुविधा: यदि आप मंडी में सरकारी रेट (MSP) पर अनाज बेचना चाहते हैं, तो आधुनिक हाइब्रिड किस्में (जैसे DBW-187 या HD-3086) ज्यादा फायदेमंद रहेंगी क्योंकि उनकी पैदावार बहुत अधिक होती है।

मेरी सलाह:

जींद के किसान आजकल मिश्रित खेती अपना रहे हैं। आप अपने खेत के एक हिस्से (जैसे 1 एकड़) में सोना मोती उगाकर इसकी शुरुआत कर सकते हैं। इसे प्राकृतिक तरीके से उगाएं ताकि आप इसे 'शुद्ध और पौष्टिक गेहूं' के तौर पर प्रीमियम रेट पर बेच सकें। जींद में कई प्रगतिशील किसान देशी गेहूं उगाकर सीधे शहरों में ऊँचे दामों पर बेच रहे हैं।

Sona Moti Wheat farming guide





सोना मोती और बंसी जैसी पुरानी या देसी गेहूं की किस्में आजकल अपनी पौष्टिकता के कारण काफी चर्चा में हैं। अगर हम इनकी तुलना आधुनिक हाइब्रिड या हाई-ल्डिंग (ज्यादा पैदावार वाली) किस्मों से करें, तो स्थिति कुछ इस प्रकार है:

पोषक तत्वों का तुलनात्मक विश्लेषण

| पोषक तत्व | सोना मोती / बंसी (देसी किस्में) | आधुनिक हाइब्रिड किस्में |

|---|---|---|

| प्रोटीन | उच्च (लगभग 12-14%) | मध्यम (लगभग 8-10%) |

| फोलिक एसिड | काफी अधिक मात्रा में | तुलनात्मक रूप से कम |

| खनिज (Minerals) | मैग्नीशियम और आयरन से भरपूर | प्रसंस्करण (Processing) में कम हो जाते हैं |

| ग्लाइसेमिक इंडेक्स | कम (शुगर रोगियों के लिए बेहतर) | अधिक (जल्दी पचता है, शुगर बढ़ा सकता है) |

| ग्लूटेन | कम और सुपाच्य | अधिक और जटिल (Heavy) |

क्या ये सच में ज्यादा बेहतर हैं?

हाँ, वैज्ञानिक शोध और पारंपरिक ज्ञान दोनों ही संकेत देते हैं कि सोना मोती और बंसी जैसी प्राचीन किस्में पोषण के मामले में आगे हैं:

 * सोना मोती (Sona Moti): इसे "हजार साल पुराना गेहूं" भी कहा जाता है। इसमें फोलिक एसिड की मात्रा हाइब्रिड गेहूं की तुलना में लगभग 40-50% ज्यादा होती है। यह ब्लड प्रेशर और शुगर के मरीजों के लिए बेहतरीन माना जाता है।

 * बंसी गोल्ड (Bansi Gold): यह अपनी कठोरता और सुनहरे रंग के लिए जाना जाता है। इसमें फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो पाचन तंत्र के लिए बहुत फायदेमंद है।

 * हाइब्रिड गेहूं की कमी: आधुनिक किस्मों को मुख्य रूप से ज्यादा पैदावार और बीमारियों से लड़ने के लिए विकसित किया गया है। इस प्रक्रिया में अक्सर स्वाद और सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micronutrients) की सघनता कम हो जाती है।

एक जरूरी बात (The Reality Check)

हालांकि पोषण में ये किस्में बेहतर हैं, लेकिन इनकी पैदावार (Yield) हाइब्रिड के मुकाबले काफी कम होती है। यही कारण है कि ये बाजार में हाइब्रिड गेहूं की तुलना में काफी महंगे मिलते हैं।

> निष्कर्ष: यदि आपका लक्ष्य बेहतर स्वास्थ्य और प्राकृतिक पोषण है, तो सोना मोती या बंसी गोल्ड निश्चित रूप से आधुनिक हाइब्रिड गेहूं से बेहतर विकल्प हैं।

सोना मोती और बंसी के अलावा भारत में कई अन्य प्राचीन और देशी गेहूं की किस्में हैं जो अपने विशिष्ट स्वास्थ्य लाभों के लिए जानी जाती हैं। यहाँ कुछ प्रमुख किस्मों और उनके अनुमानित बाजार भाव की जानकारी दी गई है:

प्रमुख देशी गेहूं की किस्में और उनकी विशेषताएं

| किस्म का नाम | विशेषता | अनुमानित रेट (प्रति क्विंटल) |

|---|---|---|

| शरबती (Sharbati) | इसे 'प्रीमियम गेहूं' माना जाता है। दाने चमकदार होते हैं और रोटियां बहुत नरम बनती हैं। | ₹4,500 – ₹6,000 |

| कठिया (Kathiya) | इसमें फाइबर और प्रोटीन बहुत अधिक होता है। यह दलिया और सूजी बनाने के लिए बेस्ट है। | ₹3,500 – ₹5,000 |

| खपली / एम्मर (Khapli) | यह शुगर (Diabetes) के मरीजों के लिए वरदान मानी जाती है। इसका दाना लंबा होता है। | ₹7,000 – ₹10,000 |

| काला गेहूं (Black Wheat) | इसमें 'एंथोसायनिन' (Anthocyanin) एंटीऑक्सीडेंट होता है जो कैंसर और हार्ट की बीमारियों से बचाता है। | ₹4,000 – ₹8,000 |

| सिहोर गेहूं (Sehore) | मध्य प्रदेश की यह किस्म अपनी मिठास और स्वाद के लिए प्रसिद्ध है। | ₹4,000 – ₹5,500 |

| सोना मोती (Paigambari) | सबसे प्राचीन किस्म, फोलिक एसिड का भंडार और ग्लूटेन मुक्त के करीब। | ₹8,000 – ₹12,000 |

रेट में इतना अंतर क्यों है?

देशी गेहूं के दाम सामान्य हाइब्रिड गेहूं (जो ₹2,300 - ₹2,700 के आसपास होता है) से ज्यादा होने के मुख्य कारण ये हैं:

 * कम पैदावार: हाइब्रिड गेहूं जहाँ एक एकड़ में 20-25 क्विंटल होता है, वहीं देशी गेहूं केवल 8-12 क्विंटल ही हो पाता है।

 * शुद्धता: इन किस्मों को उगाने में अक्सर रासायनिक खाद (Fertilizers) का उपयोग नहीं किया जाता, जिससे ये ऑर्गेनिक श्रेणी में आ जाते हैं।

 * औषधीय गुण: खपली और सोना मोती जैसी किस्मों की मांग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों में बहुत ज्यादा है, जबकि सप्लाई कम है।

खरीदारी के समय ध्यान रखने योग्य बात:

बाजार में रेट क्षेत्र (Region) और क्वालिटी के आधार पर बदल सकते हैं। यदि आप सीधे किसानों से या जैविक मंडियों (Organic Markets) से खरीदते हैं, तो आपको बेहतर गुणवत्ता और सही दाम मिल सकते हैं।


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